मुफ्तखोरी राजनीति पर व्यंग्य: अच्युतम केशवम की कविता 'मुफ्तुल्ले' में सांप्रदायिक सद्भाव और संसदीय तंत्र पर तंज
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<TITLE>मुफ्तखोरी राजनीति पर व्यंग्य: अच्युतम केशवम की कविता 'मुफ्तुल्ले' में सांप्रदायिक सद्भाव और संसदीय तंत्र पर तंज</TITLE> <BODY>कवि अच्युतम केशवम द्वारा रचित एक व्यंग्यात्मक कविता सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है, जिसमें भारत में मुफ्तखोरी की राजनीति, सा
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मूल रिपोर्ट: Amar Ujala

