कवि नहीं हूँ मैं — एक आत्मकथ्य
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यह एक आत्मकथ्यात्मक कविता है जिसमें लेखक ने अपनी पहचान और लेखन के प्रति समाज के रवैये पर सवाल उठाए हैं। कविता की शुरुआत प्रश्न से होती है — "कौन जानेगा मुझ अभागे को, मैं लिखता हूँ, लिखना काम है मेरा।" लेखक बताता है कि शायद उनका नाम ही "राज़" है, इसलिए लोग उन्ह
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मूल रिपोर्ट: Amar Ujala


