दिनेश चौहान की कविता 'बैठ मयखाने में जो पी रहे हैं' में जीवन के दर्द का बयान
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कवि दिनेश चौहान की एक कविता सामने आई है जिसमें मयखाने में बैठकर पीने वालों के जीवन का मार्मिक चित्रण किया गया है। यह कविता उन लोगों की दास्तान कहती है जो दुनिया के सारे गम पी रहे हैं और अपना सफ़र काट रहे हैं।
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मूल रिपोर्ट: Amar Ujala

