कवि रुपेश परदेशी की कविता 'झूठ की डाल' में समाज में फैले झूठ पर तीखा व्यंग्य
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<TITLE>कवि रुपेश परदेशी की कविता 'झूठ की डाल' में समाज में फैले झूठ पर तीखा व्यंग्य</TITLE> <BODY>कवि रुपेश परदेशी ने अपनी कविता 'झूठ की डाल' में समाज में बढ़ते झूठ और सच की उपेक्षा पर गहरी टिप्पणी की है। कविता में उन्होंने झूठ की ताकत और उसके व्यापक सामाजिक प
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मूल रिपोर्ट: Amar Ujala

