यह एक कविता है, समाचार नहीं
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प्रस्तुत पंक्तियाँ किसी समाचार लेख का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह उर्दू-हिंदी शायरी की एक छोटी नज़्म है जिसमें समय के साथ सुंदरता (हुस्न) के क्षीण होने का वर्णन है। मूल पंक्तियों में कहा गया है कि जैसे शाम ढलने पर सूरज की चमक चली जाती है और सुबह होते ही सितारे व
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मूल रिपोर्ट: Amar Ujala

